विंस्टन चर्चिल के अनमोल विचार (Winston Churchill Quotes in Hindi)

विंस्टन चर्चिल का जन्म 30 नवम्बर 1874 को आक्सफोर्ड शायर के ब्लेनहिम पैलेस में हुआ था। इनके पिता लार्ड रेनडल्फ चर्चिल थे, माता जेनी न्यूयार्क नगर के लियोनार्ड जेराम की पुत्री थीं। चर्चिल की शिक्षा हैरी और सैंहर्स्ट में हुई। वे 1895 में सेना में भरती हुए और 1897 में मालकंड के युद्धस्थल में तथा 1898 में  उमदुरमान के युद्ध में भाग लिया। इन यद्धों ने उन्हें दो पुस्तकों – दि स्टोरी ऑव मालकंड फील्ड फोर्स (1898) और दि रिवर वार (1899) – के लिये पर्याप्त सामग्री प्रदान की। दक्षिणी अफ्रीका के युद्ध (1899-1902) के समय वह मार्निग पोस्ट के संवाददाता का कार्य कर रहे थे। वे वहाँ बंदी भी हुए, परंतु भाग निकले। उन्होंने अपने अनुभवों का उल्लेख ‘लंदन टु लेडीस्मिथ वाया प्रिटोरिया’ (1900) में किया है।

विंस्टन चर्चिल 24 जनवरी, 1965) अंग्रेज राजनीतिज्ञ।  वे द्वितीय विश्वयुद्ध, 1940-1945 के समय इंगलैंड के प्रधानमंत्री थे। चर्चिल प्रसिद्ध कूटनीतिज्ञ और प्रखर वक्ता था। वो सेना में अधिकारी भी थे  साथ ही साथ वह इतिहासकार, लेखक और कलाकार भी थे । वह एकमात्र इंग्लेंड के प्रधानमंत्री थे . जिन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

विंस्टन चर्चिल  ने अपने आर्मी कैरियर के दौरान विंस्टन चर्चिल  भारत, सूडान और द्वितीय विश्वयुद्ध में अपना जौहर दिखाया था। उसने युद्ध संवाददाता के रूप में ख्याति पाई थी। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान चर्चिल ने ब्रिटिश सेना में अहम जिम्मेदारी संभाली थी। राजनीतिज्ञ के रूप में उन्होंने कई पदों पर कार्य भी किया। विश्वयुद्ध से पहले वे गृहमंत्रालय में व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष रहे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान वे लॉर्ड ऑफ एडमिरिल्टी बने रहे। युद्ध के बाद उन्हें शस्त्र भंडार का मंत्री बनाया गया। 10 मई 1940 को उन्हें युनाइटेड किंगडम का प्रधानमंत्री बनाया गया और उन्होंने धूरी राष्ट्रों के खिलाफ लड़ाई जीती। विंस्टन चर्चिल प्रखर वक्ता थे।

1953 में उन्हें साहित्य सेवा के लिये नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। वह विश्वशांति के लिये एकाग्रचित्त होकर प्रयत्नशील रहे उन्होंने अंग्रेजी भाषा भाषियों का एक वृहत् इतिहास अपने विशिष्ट दृष्टिकोण से लिखा है। वृद्धावस्था और अस्वस्थ्य के कारण उन्होंने 5 अप्रैल 1955 को प्रधान मंत्री के पद से त्यागपत्र दे दिया और इस प्रकार राजनीति से अवकाश ग्रहण  किया।


 हिंदी अनमोल विचार

जब तक सत्य घर से बाहर निकल पाता है तब तक तो झूठ आधी दुनिया घूम चूका होता है।

जब तक सत्य घर से बाहर निकल पाता है तब तक तो झूठ आधी दुनिया घूम चूका होता है।

असफलताओ के बावजूद , हर बार उत्साह के साथ उठ कर चलना ही सफलता है।

असफलताओ के बावजूद , हर बार उत्साह के साथ उठ कर चलना ही सफलता है

एक निराशावादी को हर अवसर में कठिनाई दिखती है और आशावादी को हर कठिनाई में अवसर।

एक निराशावादी को हर अवसर में कठिनाई दिखती है और आशावादी को हर कठिनाई में अवसर।

सफलता अंत नहीं है , असफलता घातक नहीं है लगे रहने का साहस ही मायने रखता है।

सफलता अंत नहीं है , असफलता घातक नहीं है लगे रहने का साहस ही मायने रखता है।

यदि हम भूत और भविष्य के विवाद में फंसते हैं तो हम पायेंगे कि हमने भविष्य खो दिया है।

यदि हम भूत और भविष्य के विवाद में फंसते हैं तो हम पायेंगे कि हमने भविष्य खो दिया है।

हमे जो मिलता है उससे हमारी ज़िंदगी चलती है और जो हम देते है उससे ज़िंदगी बनती है।

हमे जो मिलता है उससे हमारी ज़िंदगी चलती है और जो हम देते है उससे ज़िंदगी बनती है।

व्यक्ति को जो करना है, वह करना ही चाहिये चाहे इसके व्यक्तिगत नतीजे कुछ भी क्यों न हो। बाधाए हो, खतरे हों या दबाव पड़ रहा हो और यही मानवीय नैतिकता का आधार है।

व्यक्ति को जो करना है, वह करना ही चाहिये चाहे इसके व्यक्तिगत नतीजे कुछ भी क्यों न हो। बाधाए हो, खतरे हों या दबाव पड़ रहा हो और यही मानवीय नैतिकता का आधार है।

स्वस्थ्य नागरिक किसी देश के लिए सबसे बड़ी संपत्ति होते हैं।

स्वस्थ्य  नागरिक  किसी  देश  के  लिए  सबसे  बड़ी  संपत्ति  होते  हैं।

सभी के दिन आते हैं और कुछ दिन औरों से ज्यादा लम्बे होते हैं।

सभी  के  दिन  आते  हैं  और  कुछ  दिन  औरों  से  ज्यादा  लम्बे  होते  हैं।

नज़रिया एक छोटी चीज़ होती है,लेकिन बड़ा फर्क डालती है।

नज़रिया एक छोटी चीज़ होती है,लेकिन बड़ा फर्क डालती है।