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भारत में महिलाओं की स्थिति

 भारत में महिलाओं की स्थिति

महिलाओं की स्थिति : राजस्थान में महिलाओं की स्थिति ने पिछली कुछ सदियों में कई बड़े बदलावों का सामना किया है| पुरुषों के साथ बराबरी की स्थिति से लेकर मध्ययुगीन काल के निम्न स्तरीय जीवन , और साथ ही कई सुधारकों द्वारा समान अधिकारों को बढ़ावा दिए जाने तक, राजस्थान में महिलाओं  का इतिहास काफी गतिशील रहा है| विशेष रूप से महिलाओं की भूमिका की चर्चा करने वाले साहित्य के स्रोत बहुत ही कम हैं|

ऐतिहासिक प्रथाएं

सती प्रथा :sati prtha सती प्रथा एक प्राचीन और काफ़ी हद तक विलुप्त रिवाज है, कुछ समुदायों में विधवा को अपने पति की चिता में अपनी जीवित आहुति देनी पड़ती थी. हालांकि यह कृत्य विधवा की ओर से स्वैच्छिक रूप से किये जाने की उम्मीद की जाती थी, ऐसा माना जाता है कि कई बार इसके लिये विधवा को मजबूर किया जाता था. 1829 में अंग्रेजों ने इसे समाप्त कर दिया. आजादी के बाद से सती होने के लगभग चालीस मामले प्रकाश में आये हैं|1987 में राजस्थान की रूपकंवर का मामला सती प्रथा (रोक) अधिनियम का कारण बना|

 

jauhar prtha  जौहर प्रथा : जौहर का मतलब सभी हारे हुए (सिर्फ राजपूत) योद्धाओं की पत्नियों और बेटियों के शत्रु द्वारा बंदी बनाये जाने और इसके बाद उत्पीड़न से बचने के लिये स्वैच्छिक रूप से अपनी आहुति देने की प्रथा है. अपने सम्मान के लिए मर-मिटने वाले पराजित राजपूत शासकों की पत्नियों द्वारा इस प्रथा का पालन किया जाता था. यह कुप्रथा केवल भारतीय राजपूतोंशासक वर्ग तक सीमित थी प्रारंभ में, और राजपूतों ने या शायद एक-आध किसी दूसरी जाति की स्त्री ने सति (पति/पिता की मृत्यु होने पर उसकी चिता में जीवित जल जाना) जिसे उस समय के समाज का एक वर्ग पुनीत धार्मिक कार्य मानने लगा था।जाटों की स्त्रीयां युद्ध क्षेत्र में पति के कन्धे से कन्धा मिला दुश्मनों के दान्त खट्टे करते हुए शहीद हो जाती थी।

prda prthaपरदा प्रथा :परदा वह प्रथा है जिसमें कुछ समुदायों में महिलाओं को अपने तन को इस प्रकार से ढंकना जरूरी होता है कि उनकी त्वचा और रूप-रंग का किसी को अंदाजा ना लगे. यह महिलाओं के क्रियाकलापों को सीमित कर देता है; यह आजादी से मिलने-जुलने के उनके अधिकार को सीमित करता है और यह महिलाओं की अधीनता का एक प्रतीक है. आम धारणा के विपरीत यह ना तो हिंदुओं और ना ही मुसलमानों के धार्मिक उपदेशों को प्रतिबिंबित करता है, हालांकि दोनों संप्रदायों के धार्मिक नेताओं की लापरवाही और पूर्वाग्रहों के कारण गलतफ़हमी पैदा हुई है|

devdasiदेवदासीसियाँ प्रथा : देवदासी दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में एक धार्मिक प्रथा है जिसमें देवता या मंदिर के साथ महिलाओं की “शादी” कर दी जाती है. यह परंपरा दसवीं सदी ए.डी. तक अच्छी तरह अपनी पैठ जमा जुकी थी| बाद की अवधि में देवदासियों का अवैध यौन उत्पीडन भारत के कुछ हिस्सों में एक रिवाज बन गया |

 

 

 

हमारे देश मै आज भी कई राज्यों मै ये सब होता है और हमे इन सारे समस्याओ को समाज से दूर कर देना चाहे और इसे बदल कर एक नये समाज का निर्माण करना चाहे |

Writing :Harendra Singh Negi

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